सिनेमाघरों में अक्सर ऐसी फिल्मों का इंतजार रहता है, जो पूरे परिवार को एक साथ लाकर मनोरंजन का एक खुशनुमा माहौल दे सकें। निर्देशक आदिश राणा की नई फिल्म 'जीना दिल से' भी इसी कोशिश का एक हिस्सा है। यह फिल्म एक रंगीन, हल्की-फुल्की और पूरी तरह से एंटरटेनिंग म्यूजिकल फैमिली ड्रामा है, जो अपने भीतर कॉमेडी, रोमांस, दोस्ती और पारिवारिक जज्बातों का एक बड़ा संसार समेटे हुए है। आज के दौर के युवाओं और फैमिली ऑडियंस को ध्यान में रखकर बनाई गई यह फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक अपनी पॉजिटिव वाइब और मस्तीभरे माहौल से दर्शकों को जोड़े रखने का दावा करती है। अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ घंटे हंसने और थियेटर में पैर थिरकाने के मूड में हैं तो यह फिल्म आपके लिए एक मनोरंजक विकल्प साबित हो सकती है। फिल्म को 3 स्टार दिए जा रहे हैं। आइए इस रिव्यू में विस्तार से जानते हैं कि यह फिल्म उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है।
क्या है इस संगीतमय सफर की कहानी?
फिल्म की कहानी का ताना-बाना समकालीन युवाओं की ज़िंदगी, उनके सपनों, आपसी रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों के इर्द-गिर्द बुना गया है। निर्देशक ने कहानी को बहुत जटिल न रखते हुए इसे सीधा और सरल रखा है। प्लॉट की शुरुआत होती है कुछ ऐसे किरदारों से जो अपनी ज़िंदगी को अपने तरीके से जीना चाहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनके रास्ते एक-दूसरे से टकराते हैं। इस सफर में प्यार की शुरुआत होती है, दोस्ती की परीक्षा होती है और कुछ पारिवारिक गलतफहमियां भी सामने आती हैं। फिल्म का पूरा कथानक इन्हीं किरदारों के उतार-चढ़ाव, उनके बीच की खट्टी-मीठी नोक-झोंक और अंत में एक बड़े पारिवारिक जुड़ाव की तरफ बढ़ता है। कहानी में ड्रामा और ट्विस्ट लाने की कोशिश की गई है, जो फिल्म के दूसरे हिस्से को आगे बढ़ाता है।
15 कलाकारों की फौज और उनकी केमिस्ट्री
फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी विशाल और दमदार स्टार कास्ट है। 'जीना दिल से' में लगभग 15 मुख्य और सहायक कलाकारों का एक बड़ा एन्सेम्बल देखने को मिलता है। इतने सारे चेहरों को एक साथ पर्दे पर देखना और उनके साथ न्याय करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन कलाकारों ने अपनी परफॉर्मेंस से निराश नहीं किया है। मुख्य कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी से मेहनत की है। युवाओं की भूमिका निभा रहे एक्टर्स ने अपनी एनर्जी से स्क्रीन पर फ्रेशनेस बिखेरी है। फिल्म में मुख्य किरदारों के बीच की कॉमिक टाइमिंग और रोमांटिक केमिस्ट्री काफी सहज और मजेदार लगती है। सहायक भूमिकाओं में नज़र आए सीनियर कलाकारों ने फिल्म को इमोशनल गहराई देने का काम किया है। हल्के-फुल्के संवादों को अभिनेताओं ने जिस बेबाकी और सहजता से डिलीवर किया है, वह दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने में पूरी तरह सफल रहता है।
आदिश राणा का विजन और मनोरंजन का संतुलन
निर्देशक आदिश राणा ने इस फिल्म के जरिए यह साबित करने की कोशिश की है कि वह आधुनिक युवाओं की सोच और पारंपरिक पारिवारिक मनोरंजन के बीच एक अच्छा संतुलन बनाना जानते हैं। 15 कलाकारों को स्क्रीन पर संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना और किसी भी किरदार को पीछे न छूटने देना उनके सधे हुए निर्देशन की गवाही देता है। आदिश ने फिल्म को बहुत भारी-भरकम या उपदेशात्मक बनाने के बजाय इसे एक उत्सव की तरह पेश किया है। फिल्म की पेसिंग पर उनका नियंत्रण दिखता है, जिससे थियेटर में बोरियत का अहसास नहीं होता। उन्होंने हर किरदार को एक अलग पहचान, मैनरिज्म और स्क्रीन प्रेजेंस देने की बेहतरीन कोशिश की है, जो इस तरह की मल्टी-स्टॉरर फिल्मों में बेहद जरूरी होता है।
रंगीन विजुअल्स और धमाकेदार म्यूजिक
तकनीकी तौर पर 'जीना दिल से' एक बेहद समृद्ध और चमकदार फिल्म नजर आती है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है; कैमरा वर्क ने पूरी फिल्म को बेहद रंगीन, भव्य और विजुअली अपीलिंग बनाया है। लेकिन इस फिल्म की असली जान और इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका संगीत है। छह बड़े और मनोरंजक गानों से सजी यह फिल्म दर्शकों को एक बेहतरीन म्यूजिकल एंटरटेनर का अनुभव देती है। फिल्म का हर गाना कहानी की परिस्थिति के हिसाब से फिट बैठता है।
रोमांटिक ट्रैक 'सातों जनम' अपनी सुरीली मेलोडी और गहरे इमोशन्स से सीधे दिल को छू जाता है। वहीं दूसरी ओर, 'अक्कड़ बक्कड़' एक ऐसा जोशीला गाना है जो थियेटर में दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर देता है। ग्लैमर और बेहतरीन कोरियोग्राफी से सजा गाना 'मधुबाला' स्क्रीन पर अपनी चमक बिखेरता है, जबकि 'तू लेले मजा' युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने वाली फुल ऑन एनर्जी से भरपूर वाइब देता है। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के कॉमिक और इमोशनल सीन्स को अच्छे से सपोर्ट करता है।
क्या बात दर्शकों को अखर सकती है?
हर फिल्म की तरह 'जीना दिल से' में भी कुछ कमजोर कड़ियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी का प्रेडिक्टेबल होना है। कुछ समय बाद दर्शक आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि अगले सीन में क्या होने वाला है या फिल्म का अंत किस मोड़ पर होगा। इसके अलावा, स्क्रीनप्ले कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा घिसा-पिटा और पुराना महसूस होता है। कई मेलोड्रामैटिक सीन ऐसे हैं जो हमने दशकों से बॉलीवुड फिल्मों में देखे हैं। 15 किरदारों के चक्कर में कुछ सब-प्लॉट्स (उपकहानियां) बहुत जल्दी-जल्दी सुलझते हुए दिखाई देते हैं, जिससे कुछ भावनात्मक दृश्यों का असर उतना गहरा नहीं हो पाता जितना होना चाहिए था। यदि पटकथा में थोड़े और नए प्रयोग किए जाते, तो यह फिल्म और भी बेहतरीन बन सकती थी।
क्यों देखें ये फिल्म?
'जीना दिल से' कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो सिनेमा की परिभाषा बदल दे या आपको किसी गहरी सोच में डाल दे। यह साफ-सुथरी नीयत से बनाई गई एक विशुद्ध कमर्शियल मसाला फिल्म है, जिसका एकमात्र उद्देश्य मनोरंजन करना है। प्रेडिक्टेबल कहानी होने के बावजूद, इसके शानदार गाने, कलाकारों की बेहतरीन केमिस्ट्री, लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और सधा हुआ निर्देशन इसे एक बार देखने लायक फैमिली एंटरटेनर बनाते हैं। वीकेंड पर अगर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ हंसने, गाने गुनगुनाने और एक हल्का-फुल्का समय बिताने की सोच रहे है, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। फिल्म को 5 में से 3 रेटिंग दी जा रही है।